
यूआईआईसी एजेंटों का हल्ला बोल, कमीशन कटौती और कम डिस्काउंट दरों के खिलाफ सौंपा ज्ञापन
कानपुर (पहचान तुम्हारी)। यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (UIIC) के एजेंटों ने कमीशन में लगातार हो रही एकतरफा कटौती और भारी मालवाहक वाहनों पर मिल रहे कम डिस्काउंट के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है। जनरल इंश्योरेंस एजेंट्स वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (GIAWOI) के आह्वान पर कानपुर नगर DO-1 में एजेंट किंशुक श्रीवास्तव सहित अन्य एजेंटों ने ब्रांच मैनेजर अर्पित लूथरा को ज्ञापन सौंपकर विवादित सर्कुलर को तुरंत प्रभाव से वापस लेने की मांग की है।
विस्तृत जानकारी के अनुसार, जनरल इंश्योरेंस एजेंट्स वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया ने प्रबंधन की उन नीतियों पर गहरी चिंता व्यक्त की है, जिनसे देश भर के बीमा एजेंटों की आय को भारी नुकसान पहुंच रहा है। संगठन ने 30 जुलाई 2026 को जारी सर्कुलर (सं. H.O./MKTG/CIR/09/26/27) का सख्त विरोध किया है। इस सर्कुलर के तहत टू-व्हीलर और 2000 किग्रा से 3500 किग्रा श्रेणी के मालवाहक वाहनों के बीमा कमीशन में बड़ी कटौती कर दी गई है। वहीं, 40,000 किग्रा से अधिक भारी मालवाहक वाहनों के मामले में कंपनी द्वारा दी जा रही वर्तमान डिस्काउंट (छूट) दरें, अन्य सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियों की तुलना में काफी कम और अप्रतिस्पर्धी हैं।
डिस्काउंट दरें कम होने के कारण एजेंट ग्राहकों को बेहतर विकल्प नहीं दे पा रहे हैं, जिससे इस व्यवसाय को लाने में उन्हें कोई उचित पारिश्रमिक नहीं मिल पा रहा है। ठीक यही समस्या यात्री बसों और अन्य मोटर बीमा उत्पादों में भी आ रही है। कानपुर में ज्ञापन सौंपने वाले एजेंटों ने मांग की है कि इस सर्कुलर को तुरंत वापस लिया जाए और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य ‘वन इंडिया वन कमीशन’ व्यवस्था बहाल की जाए।
इसके साथ ही, राज्य, जोन और आरटीओ (RTO) के आधार पर कमीशन में अंतर को एजेंटों के साथ सीधा भेदभाव बताया गया है। हेल्थ और अन्य बीमा पोर्टफोलियो में पिछले एक साल से बंद पड़े इंसेंटिव को बिना किसी देरी के बहाल करने की मांग उठाई गई है।
ज्ञापन में यह भी प्रमुखता से उठाया गया है कि थर्ड-पार्टी क्लेम (ICR) को एजेंटों की ‘स्टार कैटेगरी’ और प्रदर्शन मूल्यांकन से न जोड़ा जाए, क्योंकि सड़क दुर्घटनाएं एजेंट के नियंत्रण में नहीं होती हैं। स्टार कैटेगरी का निर्धारण नए व्यवसाय, ग्राहक सेवा और रिन्यूअल जैसे वास्तविक मापदंडों पर होना चाहिए। अंत में एजेंटों ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में कमीशन से जुड़ी कोई भी नीति लागू करने से कम से कम 10 दिन पहले एजेंट प्रतिनिधियों को पूर्व सूचित किया जाए।
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