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“डिलीवरी बॉय से डिप्टी कलेक्टर तक: सूरज और पूनम की आंसुओं से सजी जीत की कहानी”

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सूरज यादव : डिलीवरी बॉय से डिप्टी कलेक्टर तक का दिल छू लेने वाला सफर

झारखंड(रीजनल एक्सप्रेस)। 21 अगस्त 2025: आज हम आपको एक ऐसी कहानी सुनाने जा रहे हैं, जो हर उस इंसान के दिल को छू जाएगी, जो सपनों के पीछे भागते हुए मुश्किलों से टकराया हो। झारखंड के सूरज यादव की यह कहानी मेहनत, हौसले और प्यार की जीत की मिसाल है। एक समय जब उनके हाथों में डिलीवरी का बैग था, आज वही हाथ डिप्टी कलेक्टर की कुर्सी तक पहुंच गए हैं। लेकिन इस सफर में उनकी सबसे बड़ी ताकत रही उनकी पत्नी पूनम का अटूट विश्वास, जिसने हर मुश्किल में उनका साथ दिया। आइए, इस भावुक और प्रेरणादायक यात्रा को करीब से जानते हैं।

शुरूआत : सपनों का बीज और जिंदगी की कठिनाइयां सूरज यादव का जन्म झारखंड के गिरिडीह जिले में हुआ, जहां गरीबी और सीमित संसाधन उनकी जिंदगी का हिस्सा थे। ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने की कोशिश शुरू की। पहले वे कॉल सेंटर में नौकरी करने लगे, लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। इसी दौरान उनकी शादी पूनम से हुई, जो उनके जीवन में एक नई रोशनी बनकर आईं। लेकिन घर की हालत खस्ता थी। सूरज के सामने सवाल था—क्या कमाना शुरू करूं या अपने सपनों को पूरा करने के लिए JPSC (झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन) की तैयारी करूं?

पूनम का त्याग : पति के सपनों का सहाराइस मुश्किल घड़ी में पूनम ने एक ऐसा फैसला लिया, जो शायद हर पति-पत्नी की कहानी में यादगार बन जाए। उन्होंने सूरज से कहा, “आप पढ़ाई पर ध्यान दीजिए, खर्च की चिंता मत कीजिए।” पूनम के इस विश्वास ने सूरज को नई हिम्मत दी। शुरुआती दिनों में पूनम के मायके वालों ने आर्थिक मदद की, लेकिन जब उनका परिवार बढ़ा और एक बेटे का जन्म हुआ, तो जिम्मेदारियां और बढ़ गईं। ससुराल से मदद रुक गई, क्योंकि वहां भी एक शादी की तैयारियां थीं। लेकिन पूनम ने हार नहीं मानी। उन्होंने फिर से सूरज को हिम्मत दी और कहा, “JPSC की तैयारी जारी रखो, हम somehow सब संभाल लेंगे।”संघर्ष के दिन: डिलीवरी बॉय से लेकर रातों की मेहनतसूरज ने हिम्मत नहीं हारी। दिन में वे डिलीवरी बॉय और रैपिडो ड्राइवर की नौकरी करते, और रात में किताबों के बीच जूझते। उनकी छोटी सी पढ़ाई की जगह—जिसकी दीवारों पर नक्शे और अखबार चिपके थे—गवाह बनी उनकी मेहनत की। 2022 में JPSC की परीक्षा हुई, लेकिन महज सात अंकों की कमी ने उन्हें मेन में सफलता से दूर रखा। आंसुओं के साथ हिम्मत टूटने की कगार पर थे, लेकिन पूनम का हाथ उनके कंधे पर था। उन्होंने कहा, “एक बार और कोशिश करो, हम साथ हैं।”जीत का पल: डिप्टी कलेक्टर बनने की मंजिलसालों की मेहनत रंग लाई। 25 जुलाई 2025 को, जब JPSC ने सिविल सेवा परीक्षा 2023 के परिणाम घोषित किए, तो सूरज यादव का नाम 110वीं रैंक के साथ चमका। यह वही सूरज था, जिसने कभी सड़कों पर डिलीवरी के लिए बाइक दौड़ाई थी। अब वह डिप्टी कलेक्टर बनने जा रहा है। जब यह खबर उनके घर पहुंची, तो पूनम की आंखों में खुशी के आंसू थे, और सूरज ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी पत्नी को दिया।एक मां का बलिदान और समाज का संदेशपूनम की कहानी भी कम प्रेरणादायक नहीं है। एक मां और पत्नी के तौर पर उन्होंने अपने परिवार को संभाला, अपने सपनों को पीछे छोड़कर सूरज के सपनों को पंख दिए। यह कहानी सिर्फ सूरज की नहीं, बल्कि हर उस महिला की है जो चुपचाप परिवार की नींव मजबूत करती है। झारखंड से निकली यह कहानी अब पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गई है। दिल की बात सूरज और पूनम की यह जोड़ी हमें सिखाती है कि मेहनत और विश्वास के आगे कोई बाधा टिक नहीं सकती। जब परिवार एक-दूसरे का हाथ थाम ले, तो गरीबी, असफलता और मुश्किलें भी झुक जाती हैं। सूरज आज डिप्टी कलेक्टर बनकर न सिर्फ अपने सपने पूरे कर रहे हैं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण बन गए हैं, जो संघर्ष की राह पर हैं।तो दोस्तों, अगली बार जब आप मेहनत से थक जाएं, तो सूरज और पूनम की इस कहानी को याद कीजिए। क्योंकि असली जीत वही है, जो दिल से दिल तक जाती हो। सूरज को बधाई और पूनम को सलाम—इस जोड़ी ने साबित कर दिया कि प्यार और हिम्मत से कुछ भी मुमकिन है!

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