
जीवन जीने की राह बताती हैं श्रीमद्भागवत कथा : अनूप महाराज
हरदोई (रीजनल एक्स्प्रेस)। जिला हरदोई के ग्राम सैतियापुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस में असलापुर धाम से पधारें सुप्रसिद्ध कथावाचक अनूप ठाकुर महाराज ने कहा कि जीवन को कैसे जिया जाए। इसको लेकर विस्तार से व्याख्या की। उन्होंने बताया कि भागवत हमें जीने की राह बताती है, इसलिए हम सभी को भागवत चिंतन और पठन करना चाहिए।
ठाकुर जी ने राजा परीक्षित की कथा सुनाते हुए बताया कि राजा परीक्षित एक दिन शिकार के लिए वन जा रहे थे। रास्ते में उन्होंने देखा कि एक व्यक्ति बैल और गाय को पीट रहा है। तब राजा परीक्षित ने उसको ललकारा और पूछा कि तुम कौन हो और जानवरों पर अत्याचार क्यों कर रहे हो। तब उसने बताया कि मैं कलयुग हूं। तब राजा ने उससे कहा कि मेरे राज्य के बाहर निकल जाओ ये सुनकर वो गिड़गिड़ाने लगा और अपना गुण बताया तो राजा को उस पर दया आ गयी और कहा कि मेरे राज्य में तुम इन स्थानों पर रह सकते हो। जहां जुआं हो, मांस मदिरा का सेवन किया जाता हो और कलयुग ने एक अच्छा स्थान मांगा परिक्षित जी ने कहा स्वर्ण में तुम निवास कर सकते हो। स्वर्ण में निवास मिलते ही कलयुग राजा के मुकुट पर विराजमान हो गया और राजा की मति भ्रमित कर दी एक साधू तपस्या कर रहे थे, उनके गले में मरा हुआ साँप डाल दिया। साधू का पुत्र कुटिया में आया और पिता के गले में साँप देखकर उसने श्राप दे दिया कि जिस किसी ने ये साँप डाला है। आज के सातवें दिन उस को तक्षक नाग डस लेगा और उसकी मृत्यु हो जायेगी।
अनूप महाराज ने कहा संत के द्वारा श्राप लगा तो परीक्षित जी ने संत सुखदेव से पूछा कि मरने वाले को मरने के पूर्व क्या करना चाहिए। यह प्रश्न किया जो कि हर मानव के लिए आज भी है। इस प्रश्न का उत्तर हमें श्रीमद् भागवत जी में मिलता है। सुखदेव जी ने श्रीमद् भागवत जी में बतलाया है कि मरने वाले को भगवत चरणों में चिंतन करना चाहिए। भागवत कथा हमें जीने की राह बताती है। आयोजक शिवराम सिंह चौहान, रनवीर सिंह चौहान, छोटेलाल सिंह चौहान, कल्लू सिंह चौहान, केशव वाजपेई, शिवा शुक्ला, आलोक अवस्थी, शनि सिंह चौहान, अनमोल त्रिवेदी, सौरभ, लवकुश समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहें!








