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तन से नहीं मन से बने सुंदर परमात्मा को भी सुंदर मन पसंद है : अनूप महाराज

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हरदोई(रीजनल एक्स्प्रेस)। जिला हरदोई के ग्राम लोनार में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में असलापुर धाम से पधारें सुप्रसिद्ध कथावाचक अनूप ठाकुर महाराज ने चतुर्थ दिवस की कथा को सुनाते हुए कहा कि भगवान को भी सुंदर तन नहीं बल्कि सुंदर मन पसंद है निर्मल मन जन सो मोहिं पावा, मोहि कपट छल छिद्र न भावा! शरीर वहीं सुंदर है जिस शरीर को पाकर भगवान का भजन हो सके

सोई पावन सोई सुभग शरीरा, जो तन पाई भजिई रघुवीरा!

सजावटी शरीर सुंदर नहीं शरीर और मन वहीं सुंदर है जिस शरीर को पाकर ज्यादा से ज्यादा प्रभु का भजन हो सके इसी के साथ

व्यास अनूप महाराज ने कहा कि इस धरा धाम पर जब जब पापाचार अत्याचार दुराचार बढ़ता है तब परमात्मा अवतार लेकर दुष्टों को मारकर धर्म की स्थापना करते हैं!

श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाते हुए कथावाचक अनूप महाराज ने कहा कि द्वापर युग में जब पृथ्वी पर राक्षसों के अत्याचार बढ़ने लगे तो पृथ्वी गाय का रूप धारण कर अपनी व्यथा सुनाने के लिए तथा उद्धार के लिए ब्रह्मा जी के पास गई। पृथ्वी पर पाप कर्म बहुत बढ़ गए यह देखकर सभी देवता भी बहुत चिंतित थे। ब्रह्माजी सब देवताओं को साथ लेकर पृथ्वी को भगवान श्री विष्णु के पास क्षीर सागर ले गए। उस समय भगवान विष्णु शयन कर रहे थे। स्तुति करने पर भगवान की निद्रा भंग हो गई। भगवान ने ब्रहमा जी एवं सभी देवताओं को देखकर उनके आने का कारण पूछा तो पृथ्वी बोलीं कि भगवान में पाप के बोझ से दबी जा रही हूं मेरा उद्धार करें।

ठाकुर महाराज ने कहा कि यह सुनकर भगवान विष्णु आकाशवाणी करते हुए बोले चिंता न करें मैं अवतार लेकर पृथ्वी पर आऊंगा और इसे पापों से मुक्ति प्रदान करूंगा। मेरे अवतार लेने से पहले कश्यप मुनि मथुरा के यदुकुल में जन्म लेकर वसुदेव नाम से प्रसिद्ध होंगे। तब मैं ब्रजमंडल में वासुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से ‘कृष्ण’ के रूप में जन्म लूंगा और उनकी दूसरी पत्नी के गर्भ से मेरी सवारी शेषनाग बलराम के रूप में उत्पन्न होंगे। तुम सब देवतागण ब्रज भूमि में जाकर यदुवंश में अपना शरीर धारण कर लो। कुरुक्षेत्र के मैदान में मैं पापियों का संहार कर पृथ्वी को पापों से भार मुक्त करूंगा।

कंस एक क्रूर और दुराचारी राजा था, जिसने अपनी बहन और बहनोई को कारागार में बंदी बनाकर रखा था। उसके अंत के लिए भगवान विष्णु ने जब देवकी और वासुदेव के पुत्र के रूप में जन्म लिया तो उस रात सारे सिपाही सो गए और कारागार के दरवाजे और बासुदेव की हथकड़ियां खुल गई। जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ तो कंस का बंदी गृह प्रकाशमान हो उठा। वासुदेव कृष्ण को गोकुल में नंद के घर छोड़ आए। श्रीकृष्ण का जन्म होते ही श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में झूम उठे आयोजक मोनू सिंह राठौड़, श्रीकृष्ण सिंह राठौड़, विकास सिंह राठौर, शनि सिंह, श्याम सिंह, अनमोल त्रिवेदी समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहें।

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