
केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: पुराने वाहनों को 20 साल तक चलाने की अनुमति, बढ़ी रजिस्ट्रेशन फीस
“सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स (तीसरा संशोधन), 2025” के तहत 20 अगस्त, 2025 से पूरे देश में लागू हो चुका है!
नई दिल्ली( रीजनल एक्सप्रेस)। 22 अगस्त 2025: केंद्र सरकार ने पुराने वाहनों के मालिकों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिसके तहत 15 साल से अधिक पुराने वाहनों का रजिस्ट्रेशन अब 20 साल तक बढ़ाया जा सकता है। यह नया नियम “सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स (तीसरा संशोधन), 2025” के तहत 20 अगस्त, 2025 से पूरे देश में लागू हो चुका है, सिवाय दिल्ली-NCR क्षेत्र के, जहां पहले से ही पुराने वाहनों पर सख्त नियम लागू हैं। इस नीति का उद्देश्य प्रदूषण को कम करना और सड़क सुरक्षा को बढ़ाना है, लेकिन इसके साथ ही रजिस्ट्रेशन रिन्यूअल की फीस में भारी वृद्धि ने वाहन मालिकों के बीच चर्चा का विषय बना दिया है।नई नीति के प्रमुख बिंदुकेंद्र सरकार ने पुराने वाहनों के रजिस्ट्रेशन रिन्यूअल की अवधि को 15 साल से बढ़ाकर 20 साल कर दिया है। इसका मतलब है कि वाहन मालिक अपनी गाड़ियों को 5 साल और चला सकेंगे, बशर्ते वाहन फिटनेस टेस्ट पास करे। हालांकि, इस सुविधा के लिए फीस में भारी इजाफा किया गया है, जो निम्नलिखित है:इनवैलिड कैरिज: ₹100
मोटरसाइकिल: ₹2,000
थ्री-व्हीलर/क्वाड्रिसाइकिल: ₹5,000
हल्के मोटर वाहन (LMV, जैसे कार): ₹10,000
इम्पोर्टेड टू-व्हीलर: ₹20,000
इम्पोर्टेड फोर-व्हीलर: ₹80,000
अन्य वाहन: ₹12,000

इन दरों में GST शामिल नहीं है। कमर्शियल वाहनों के लिए भी फीस बढ़ाई गई है। उदाहरण के लिए:15 साल पुराने मीडियम कमर्शियल वाहन: ₹12,000
* 15 साल पुराने भारी कमर्शियल वाहन: ₹18,000
* 20 साल पुराने मीडियम कमर्शियल वाहन: ₹25,000
* 20 साल पुराने भारी कमर्शियल वाहन: ₹36,000
इसके अलावा, फिटनेस टेस्ट की फीस भी बढ़ाई गई है। 8-15 साल पुराने टू-व्हीलर के लिए फिटनेस टेस्ट फीस ₹1,000 और 15 साल से अधिक पुराने टू-व्हीलर के लिए ₹2,000 है। तिपहिया और भारी वाहनों के लिए यह फीस ₹7,000 से ₹25,000 तक हो सकती है।
नीति का उद्देश्य
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के अनुसार, इस नीति का मुख्य उद्देश्य पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को सड़कों से हटाना है। सरकार का मानना है कि बढ़ी हुई फीस से वाहन मालिक पुराने वाहनों को स्क्रैप करने या नए, पर्यावरण के अनुकूल वाहनों को खरीदने के लिए प्रेरित होंगे। यह नीति 2021 में शुरू की गई वाहन स्क्रैपिंग पॉलिसी का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य प्रदूषण कम करना और ऑटोमोबाइल सेक्टर में नए निवेश को बढ़ावा देना है।भारत में लगभग 1.5 करोड़ से अधिक 20 साल पुराने वाहन हैं, जिनमें ज्यादातर टू-व्हीलर और कारें शामिल हैं। इनमें से कई वाहन पुराने इंजन और तकनीक के कारण अधिक प्रदूषण फैलाते हैं। सरकार की इस नीति से उम्मीद है कि वाहन मालिक या तो अपने वाहनों को स्क्रैप करेंगे या नए वाहन खरीदेंगे, जिससे सड़क सुरक्षा और पर्यावरण दोनों को लाभ होगा।
दिल्ली-NCR में अपवाद
दिल्ली-NCR क्षेत्र में यह नया नियम लागू नहीं होगा, क्योंकि वहां पहले से ही सख्त नियम हैं। दिल्ली में 10 साल से अधिक पुराने डीजल वाहन और 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहन सड़कों पर चलाने की अनुमति नहीं है। यह प्रतिबंध वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लागू किया गया है, और इस क्षेत्र में पुराने वाहनों को स्क्रैप करने या बाहर ले जाने की सख्त नीति है।
लोगों की प्रतिक्रिया और आलोचना
इस नीति को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे स्वागत योग्य कदम मानते हैं, क्योंकि इससे पुराने वाहनों के मालिकों को अपनी गाड़ियां चलाने का अतिरिक्त समय मिलेगा। हालांकि, कई लोगों ने बढ़ी हुई फीस की आलोचना की है। खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों में, जहां पुराने वाहन आम हैं, लोग इस बढ़ी हुई फीस को बोझ मान रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि वाहन की उम्र के बजाय उसकी फिटनेस को प्रदूषण और सुरक्षा का आधार बनाना चाहिए। उनका तर्क है कि एक अच्छी तरह से मेंटेन किया गया पुराना वाहन नए वाहन की तुलना में कम प्रदूषण फैला सकता है।
कैसे करें रजिस्ट्रेशन रिन्यूअल?
यदि आपके पास 15 साल से अधिक पुराना वाहन है और आप इसे 20 साल तक चलाना चाहते हैं, तो
निम्नलिखित कदम उठाएं:
* अपने वाहन को नजदीकी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) में ले जाएं।
* वाहन का फिटनेस टेस्ट करवाएं, जिसमें प्रदूषण और तकनीकी जांच शामिल होगी।
* निर्धारित फीस जमा करें और रजिस्ट्रेशन रिन्यूअल के लिए आवेदन करें।
* फिटनेस टेस्ट पास होने पर आपका रजिस्ट्रेशन 5 साल के लिए बढ़ा दिया जाएगा।
केंद्र सरकार का यह फैसला पुराने वाहनों के मालिकों के लिए राहत और चुनौती दोनों लेकर आया है। एक ओर जहां वाहन मालिकों को अपनी गाड़ियां अतिरिक्त 5 साल तक चलाने का मौका मिलेगा, वहीं बढ़ी हुई फीस और फिटनेस टेस्ट की सख्ती कई लोगों के लिए परेशानी का सबब बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति ऑटोमोबाइल सेक्टर में नए वाहनों की बिक्री को बढ़ावा देगी, लेकिन ग्रामीण और कम आय वाले वाहन मालिकों पर इसका आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है।








