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दूरसंचार विभाग का फैसला : ऑडियो कॉन्फ्रेंसिंग/ ऑडियोटेक्स/ वॉयस मेल सेवाओं के लिए लाइसेंस फ्रेमवर्क

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नई दिल्ली। दूरसंचार क्षेत्र में शुरू किए गए नीतिगत सुधारों कीश्रृंखला के अंतर्गत, सरकार ने “एकीकृत लाइसेंस के तहत ऑडियो कॉन्फ्रेंसिंग/ ऑडियोटेक्स/ वॉयस मेल सेवाओं के लिए लाइसेंस फ्रेमवर्क” जारी किया है और “वॉयस मेल सेवा (वीएमएस)/ऑडियोटेक्स (एटीएस)/ एकीकृत संदेश सेवा (यूएमएस)” के वर्त्तमान एकल (स्टैंडअलोन) लाइसेंस के नियमों तथा शर्तों में संशोधन किये हैं। वर्तमान में, दिनांक 16.07.2001 के मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार, डीओटी द्वारा वीएमएस/ऑडियोटेक्स/यूएमएस के लिए एकल लाइसेंस जारी किया जा रहा है।

“ऑडियो कॉन्फ्रेंसिंग/ ऑडियोटेक्स/ वॉयस मेल सेवाओं के लिए लाइसेंस फ्रेमवर्क” पर ट्राई की सिफारिशों की जांच करने के बाद, डीओटी ने इस प्राधिकार के लिए एक नया अध्याय जोड़कर इस लाइसेंस को एकीकृत लाइसेंस (यूएल) का हिस्सा बनाने का निर्णय लिया है। हालांकि, मौजूदा लाइसेंस से एकीकृत लाइसेंस में परिवर्तन, वीएमएस/ऑडियोटेक्स/यूएमएस लाइसेंस के  मौजूदा लाइसेंसधारियों के लिए वैकल्पिक होगा। दिनांक 16.07.2001 को जारी डीओटी दिशानिर्देशों के विरुद्ध वीएमएस/ऑडियोटेक्स/यूएमएस लाइसेंस के लिए कोई नया एकल (स्टैंडअलोन) लाइसेंस या उसका नवीनीकरण जारी नहीं किया जाएगा।

जारी की गई संशोधित नीति के अनुसार, बदलाव की मुख्य बातें इस प्रकार हैं : प्राधिकार के लिए “ऑडियो-कॉन्फ्रेंसिंग/ऑडियोटेक्स/वॉयस मेल सर्विस” नाम के एक नया अध्याय जोड़कर लाइसेंस को “एकीकृत लाइसेंस” का हिस्सा बनाया जा रहा है। ऑडियो कॉन्फ्रेंसिंग यूनिट को टीईसी मानकों के अनुसार पीएसटीएन/मोबाइल और आईपी नेटवर्क, दोनों से जोड़ा जा सकता है।लाइसेंस शर्तों के अधीन एक से अधिक इन्टरनेट सेवा प्रदाता के संसाधनों का उपयोग करने पर भी डायल आउट सुविधा की अनुमति दी जाएगी। भारत में पंजीकृत उद्यमों को सेवाएं प्रदान करने के लिए पॉइंट-टू-पॉइंट कॉन्फ्रेंसिंग की अनुमति दी गई है।यूएल के तहत लाइसेंस के लिए सेवा क्षेत्र को “एसडीसीए” से “राष्ट्रीय स्तर” यानी अखिल भारतीय स्तर पर बदला जा रहा है। हालांकि, यह वीएमएस/ऑडियोटेक्स/यूएमएस के एकल (स्टैंडअलोन) लाइसेंस के लिए एसडीसीए रहेगा।

नए लाइसेंसधारियों और मौजूदा लाइसेंसधारियों की लाइसेंस फीस एजीआर का 8 प्रतिशत होगी, जो यूएल के अन्य लाइसेंसधारियों के बराबर है। यह फ्रेमवर्क 01 जनवरी 2022 से प्रभावी होगा।

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