
यूपी के मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने मंत्रिमंडल से दिया इस्तीफा, एसपी में शामिल
लखनऊ(रीजनल एक्स्प्रेस)। यूपी के मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उनका पार्टी से इस्तीफा देना बीजेपी के लिए बड़ा झटका है। इस्तीफा देने के बाद वो समाजवादी पार्टी में शामिल भी हो गए हैं। समाजवादी पार्टी की तरफ से बीजेपी को ये बड़ा झटका माना जा रहा है, मौर्य यूपी के कद्दावर नेताओं में से एक हैं। अखिलेश यादव ने खुद ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है।
सामाजिक न्याय और समता-समानता की लड़ाई लड़ने वाले लोकप्रिय नेता श्री स्वामी प्रसाद मौर्या जी एवं उनके साथ आने वाले अन्य सभी नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों का सपा में ससम्मान हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन।
सामाजिक न्याय और समता-समानता की लड़ाई लड़ने वाले लोकप्रिय नेता श्री स्वामी प्रसाद मौर्या जी एवं उनके साथ आने वाले अन्य सभी नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों का सपा में ससम्मान हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन!
सामाजिक न्याय का इंक़लाब होगा ~ बाइस में बदलाव होगा#बाइसमेंबाइसिकल pic.twitter.com/BPvSK3GEDQ
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) January 11, 2022
मौर्या के जाने के बाद संभावना जताई जा रही है कि उनके समर्थक भी बीजेपी छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हो सकते हैं. मौर्या एक बड़े ओबीसी नेता हैं, ऐसे में बीजेपी के लिए ये बड़ा झटका है।
2017 में बीजेपी में शामिल हुए थे:- स्वामी प्रसाद मौर्य 2017 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बीजेपी में शामिल हुए थे। वो बीएसपी के बड़े नेताओं में से एक माने जाते थे। लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने बीजेपी का दामन छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है। बता दें कि एक तरफ दिल्ली में उम्मीदवारों के चयन को लेकर अहम बैठक भी चल रही है, जिसमें बीजेपी के तमाम बड़े नेता शामिल हैं। इस बैठक में सीएम योगी आदित्यनाथ भी शामिल हैं। उधर बीजेपी की बैठक चल रही है और इधर मौर्या ने राज्यपाल को इस्तीफा भेज दिया।
दलितों, पिछड़ों, किसानों, बेरोजगार नौजवानों एवं छोटे-लघु एवं मध्यम श्रेणी के व्यापारियों की घोर उपेक्षात्मक रवैये के कारण उत्तर प्रदेश के योगी मंत्रिमंडल से इस्तीफा देता हूं। pic.twitter.com/ubw4oKMK7t
— Swami Prasad Maurya (@SwamiPMaurya) January 11, 2022
स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने इस्तीफे में लिखा है कि दलितों, पिछड़ों, किसानों और बेरोजगार नौजवानों की उपेक्षा के चलते वो ये फैसला ले रहे हैं।








