
कानपुर में मेक इन इंडिया ट्रेन वंदे भारत के बनेंगे बोगी फ्रेम
कानपुर। मेक इन इंडिया ट्रेन वंदे भारत के बोगी फ्रेम एक बार फिर कानपुर में बनेंगे। फ्रेम डिब्बे का मुख्य आधार होता है, जिसके ऊपर डिब्बा बनता है। वंदे भारत के बोगी फ्रेम बनाने वाली देश की एकमात्र कंपनी पनकी में है। दो साल पहले कंपनी में वंदेभारत के बोगी फ्रेम बन रहे थे, जिसे रेलवे ने ऑर्डर देना बंद कर दिया था।
बजट में 400 वंदेभारत ट्रेन चलाने की घोषणा हुई है। यानी देश में 6400 कोच और 12,800 बोगी फ्रेम बनेंगे। इस संबंध में वेद बीएचयू और आईआईटी से पासआउट सेसोमैकेनिका के प्रबंध निदेशक आरएन त्रिपाठी ने बताया कि प्लांट पूरी तरह से तैयार है। वंदे भारत ही नहीं, मेट्रो के अत्याधुनिक कोच का निर्माण भी हम कर रहे हैं। दिल्ली मेट्रो से ऑर्डर अंतिम चरण में है। बीईएमएल बेंगलुरु से बात हो रही है। पुणे मेट्रो के लिए बोगी फ्रेम और इटली को भी निर्यात किए गए हैं।
जर्मनी की रोबोटिक मशीन से हाईटेक कोच
वंदेभारत और मेट्रो के अत्याधुनिक कोच की गुणवत्ता दुनिया की हर एजेंसी की जांच में खरी उतरी है। इसके लिए रोबोटिक वेल्डिंग मशीनें जर्मनी से आयात की गई हैं। दुनिया की सबसे बेहतरीन सीएनसी मशीनों को ताइवान से मंगाया गया है। आर एन त्रिपाठी ने कहा कि गुणवत्ता और टेक्नोलाजी के दम पर दुनिया की किसी भी कंपनी को चुनौती देने का दमखम है।
178 बोगी फ्रेम बन चुके
वेद सेसोमैकेनिका ने अभी तक वंदेभारत के 178 बोगी फ्रेम बनाकर दिए हैं। टी-20 ट्रेन के बोगी फ्रेम यहीं से निकले हैं। आखिरी ऑर्डर 30 बोगी का दिसंबर, 2019 में मिला था। बोगी फ्रेम की संवेदनशीलता और महत्व को इसी से समझा जा सकता है कि वंदेभारत के बोगी फ्रेम में ट्रेन का प्रोपल्शन सिस्टम, ड्राइव सिस्टम, ब्रेक सिस्टम एक्सल और व्हील सहित अन्य उपकरण जुड़े होते हैं। जैसे इसका काम शुरू होगा और आर्डर मिलेगा तो हर माह 60 बोगी फ्रेम का निर्माण शुरू हो जाएगा।
केवल 97 करोड़ में बना कोच
ढाई साल पहले महज 97 करोड़ में ट्रेन का एक कोच तैयार किया गया था, जबकि इस कोच की अंतर्राष्ट्रीय कीमत 325 करोड़ से भी ज्यादा है। यानी अगर इस कोच को आयात करते तो तीन गुना से भी ज्यादा भुगतान करना पड़ता। यही वजह थी कि वंदेभारत ने अपने पहले ही साल में 92 करोड़ का मुनाफा कमाया था। दुनिया के हर मानक पर खरे उतरे बोगी फ्रेम की सस्ती कीमत ने विदेशी कंपनियों को भी हैरान किया है। एक दर्जन से ज्यादा देशों ने संपर्क किया है। इटली को भी निर्यात किया गया है।








